केस 1 · फुल-माउथ रिहैबिलिटेशन











इम्प्लांट और दांत बदलने का इलाज
फुल-माउथ रिहैबिलिटेशन में एक या दोनों जबड़ों के सारे दांत दोबारा बनाए जाते हैं। यह उनके लिए है जिनके ज़्यादातर दांत जा चुके हैं, जिनके दांत बहुत घिस गए हैं या टूट गए हैं, या जिन्हें ढीले डेन्चर से परेशानी होती है।
यह प्रॉस्थोडॉन्टिस्ट का मुख्य काम है। डॉ. रीमा पहले तय करती हैं कि आपके दांत कैसे दिखने चाहिए और बाइट कैसे काम करनी चाहिए, फिर उसी के हिसाब से पूरा इलाज बनाती हैं।
कई इम्प्लांट पर पूरा सेट फिक्स किया जाता है। इन्हें आपको निकालना नहीं पड़ता।
कुछ इम्प्लांट पर क्लिप होने वाला डेन्चर। सफ़ाई के लिए निकाल सकते हैं, और खाते समय टिका रहता है।
अगर काफ़ी अच्छे दांत बचे हैं, तो उन्हें क्राउन से दोबारा बनाया जा सकता है, कभी-कभी इम्प्लांट के साथ मिलाकर।
मुँह की जाँच, X-ray या 3D स्कैन, फ़ोटो और आपकी बाइट का रिकॉर्ड।
सर्जरी से पहले ही आपके चेहरे, होंठ और बाइट के हिसाब से नए दांत डिज़ाइन किए जाते हैं।
विकल्प, स्टेज, विज़िट, समय और पूरा खर्च समझाकर आपकी सहमति से तय किया जाता है।
इम्प्लांट लगाए जाते हैं। जहाँ हो सके, हीलिंग के दौरान अस्थायी दांत लगाए जाते हैं।
फ़ाइनल फिक्स दांत बनाकर लगाए जाते हैं और आपकी बाइट के हिसाब से सेट किए जाते हैं।
डॉ. रीमा के अपने मरीज़ों की तस्वीरें, उनकी इजाज़त से। नतीजा हर व्यक्ति में अलग हो सकता है।

















फुल-माउथ रिहैबिलिटेशन MDS प्रॉस्थोडॉन्टिस्ट की ट्रेनिंग का अहम हिस्सा है।
फ़ाइनल दांत पहले प्लान होते हैं, इसलिए इम्प्लांट वहीं लगते हैं जहाँ उनकी ज़रूरत है।
शुरू करने से पहले आपको हर स्टेज, टाइमलाइन और खर्च पता होता है।
इसमें एक या दोनों जबड़ों के सारे दांत इम्प्लांट, क्राउन, ब्रिज या इनके मेल से दोबारा बनाए जाते हैं, ताकि आप भरोसे के साथ खा सकें, बोल सकें और मुस्कुरा सकें।
अक्सर हाँ, अगर इम्प्लांट को पकड़ने लायक हड्डी है। आपके केस में क्या हो सकता है, यह कंसल्टेशन में स्कैन से पता चलता है।
यह स्टेज में होता है और आमतौर पर कुछ महीने लगते हैं। आपके प्लान में हर स्टेज का टाइमलाइन दिया जाता है।
ज़्यादातर मामलों में इम्प्लांट की हीलिंग के दौरान अस्थायी दांत दिए जाते हैं। आपके लिए क्या हो सकता है, यह डॉ. रीमा समझाएँगी।
पता
पास में: HP पेट्रोल पंप, शंख सर्कल, प्रेरणातीर्थ जैन देरासर
इन इलाकों से मरीज़ आते हैं
| सोमवार से शनिवार | सुबह 9:30 से 1:00 |
|---|---|
| शाम 5:00 से 8:00 | |
| रविवार | अपॉइंटमेंट पर |
अपना सवाल या फोटो WhatsApp पर भेजिए। डॉ. रीमा की टीम आपको बताएगी कि आगे क्या करना है।